Punjab news point ; जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने अपनी रणनीति बदली है। अब घाटी के बजाय जम्मू संभाग में हमले बढ़े हैं और जवानों की शहादत भी बढ़ी है। निसंदेह सेना ने पराक्रम दिखाते हुए हुए आतंकियों को मार गिराया है। लेकिन आम तौर सुरक्षित माने जाने वाले जम्मू में हमलों का बढ़ना बताता है कि केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी। 13 और 14 सितंबर के बीच जम्मू कश्मीर में किश्तवाड़ और बारामूला में आतंकियों की तलाश में सर्च अभियान चलाया गया। इस अभियान में किश्तवाड़ में जहां दो जवानों की शहादत हुई तो बारामूला में सेना का सर्च अभियान जारी है।
जून से 14 सितंबर 2024 तक जम्मू में हुए आतंकी हमलों को देखें तो 15 दिन में 12 हमले हुए हैं। इन हमलों में 14 जवानों की शहादत हुई है, जबकि 4 आतंकी मारे गए हैं। जाहिर है कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चिंता का विषय है। 2008 के बाद यह पहली बार है जब जम्मू कश्मीर में लगातार हमले बढ़े हैं। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आतंकियों की बदली रणनीति पर निर्णायक फैसला लेने का समय आ गया है। हर बार आतंकी हमला कर गायब हो जा रहे हैं। जंगलों में आतंकियों की मौजूदगी लोगों को परेशान कर रही है।

